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वाणी मांगल ग्रुप अल्मोड़ा की शानदार पहल।

वाणी मांगल ग्रुप

वाणी मांगल ग्रुप अल्मोड़ा

समय के साथ-साथ हमारे उत्तराखंड की संस्कृति और रीति रिवाजों में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है, जैसे पहले शादी-ब्याह, नामकरण जनेऊ इत्यादि शुभ कार्यों की शुरुआत शगुन आखर गाकर किया जाता था, मार्कंडेय भगवान की पूजा और हल्दी लगाकर शुभ कामों की शुरुआत की जाती थी, दमू-नगारे बजाकर देवताओं का आह्वान किया जाता था, रणसिंघ और बिनबाज के साथ जोरदार छोलिया नृत्य होता था वो चीजें आज धीरे-धीरे विलुप्त हो चुकी हैं या होने की कगार पर हैं। ऐसे समय में इन सभी चीजों को संजोने का बेड़ा उठाया है वाणी मांगल ग्रुप अल्मोड़ा ने।

कौन-कौन हैं इस टीम में?

आपको बता दें कि अल्मोड़ा की सविता वाणी जी, ललिता सिराड़ी जी और हंशी जोशी जी ने संयुक्त रूप से एक टीम बनाई है जिसको नाम दिया है “वाणी मांगल ग्रुप अल्मोड़ा” इनका स्लोगन है ‘उत्तराखंडी संस्कृति संरक्षण प्रचार-प्रसार हेतु मात्र एक प्रयास’।

टीम बनाने का क्या है मकसद?

उत्तराखंड की संस्कृति से जुड़ी हुई चीजों को संजोकर रखने के अलावा ये टीम शुभ अवसरों पर लोगों के घरों में मांगल गीत, शगुन आखर गाने व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने का काम भी करेगी।

आने वाले दिनों में अल्मोड़ा सहित पूरे देश में कुमाऊनी संस्कृति और यहां की रिति-रिवाजों का प्रतिनिधित्व करेगी यह टीम।

वाणी मांगल ग्रुप अल्मोड़ा द्वारा बनाया गया गीत

आपको बता दें कि हाल ही में इस टीम ने एक खूबसूरत मांगल गीत रिकार्ड कर उत्तराखण्ड स्टूडियो नामक यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।

आप वीडियो को यहाँ पर देख सकते हैं 👉

जहाँ एक तरफ लोग आधुनिकता की आड़ में रीति-रिवाजों को भूलकर डीजे में पंजाबी और धूम-धड़ाके वाले फूहड़ता भरे गानों की तरफ भाग रहे हैं ऐसे में संस्कृति संरक्षण के लिए इस तरह के कदम उठाने की सख्त जरूरत है।

हम वाणी मंगल की पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं और हमें उम्मीद है कि यह टीम अल्मोड़ा के साथ-साथ प्रदेश व देश भर में अपना नाम स्थापित करेगी।

आप लिंक पर जाकर इनके चैनल को सब्सक्राईब भी कर सकते हैं – https://youtube.com/@UttarakhandStudio

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