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भीमताल झील पर मंडराने लगा खतरा! जानिए कौन है जिम्मेदार?

जलसंकट की चपेट में भीमताल झील

बढ़ती गर्मी के साथ पूरे देश भर में पानी का संकट मंडराने लगा है कई जगहों पर लोगों को पानी के लिए किलोमीटरो का सफर तय करना पड़ रहा है, उत्तराखंड की अगर बात करें तो इसके संदर्भ में ठीक ही कहा गया है कि “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी कभी भी पहाड़ के काम नहीं आता” इस बात की सैकड़ो उदाहरण हमारे पास मौजूद है।

इस लेख में आज हम बात करेंगे तालों के ताल भीमताल की, जहां देश भर से पर्यटक बोटिंग (नौकायन) करने के लिए आते हैं और यहां की खूबसूरती से मंत्रमुग्ध होकर अपने जीवन की हजारों परेशानियों को भूलकर सुकून पाते हैं, परंतु पिछले कुछ सालों के आंकड़ों को देखें तो हमें मालूम होगा कि यहां गर्मी के मौसम में साल दर साल ताल का जलस्तर घटता जा रहा है जोकि वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए खतरनाक है, इसलिए हम इसी समस्या पर चर्चा करेंगे और इसके कारणों को जानने का भी प्रयास करेंगे। (भीमताल झील पर मंडराने लगा है खतरा) 

किवदंतीयां – भीमताल झील के संदर्भ में

भीमताल के बारे में दो किवदंती है कि कुछ लोगों का मानना है कि द्वापर युग में महाभारत के समय जब पांडवों को वनवास मिला था तब पांडव कुमाऊँ क्षेत्र में भी कई दिनों तक रुके थे उसी दौरान एक बार पांचाली द्रौपदी को भयंकर प्यास लग गई, प्यास बुझाने के लिए भीम ने अपनी गदा से धरती पर प्रहार किया और वहां पानी निकल आया, भीम के गधा के प्रहार से बने उस विशालकाय जलाशय को ही भीमताल कहा गया।

जबकि एक और किवदंती है कि एक बार पांडु पुत्र भीम अकेले ही हिमालय यात्रा पर आए थे इस दौरान उन्हें आकाशवाणी हुई कि “शिवालिक की इन पहाड़ियों में भगवान शिव का वास है, तुम उनकी अराधना करो” भीम ने भगवान शिव की आराधना करना शुरू कर दिया, शिवजी का अभिषेक करने के लिए जब उन्हें पानी नहीं मिला तो उन्होंने जमीन पर एक बड़ा सा गड्ढा बनाया और उसी गड्ढे में एकत्र हुए पानी से उन्होंने शिव का जलाभिषेक किया, कहा जाता है कि भीम द्वारा बनाया गया वह गड्ढा ही भीमताल है।

खूबसूरती भीमताल झील की

भीमताल अपनी खूबसूरती के लिए भी काफी प्रसिद्ध है यहां की खूबसूरती लोगों के मन को मोह लेती है, यहां नौकायन और एक्वेरियम देखने का अपना एक अलग ही आनन्द है, ईश्वर प्रदत्त खूबसूरती और यहां का वातावरण पर्यटकों को बार-बार यहां पधारने का निमंत्रण देता है, इसके आसपास दर्जनों छोटे – बड़े ताल मौजूद होने के कारण यहां लोगों के पास आजीविका के संसाधनों की कमी नहीं है।

भीमताल
भीमताल की खूबसूरत तस्वीरें (फोटो सोशल मीडिया)

चिंता का विषय है भीमताल के क्षेत्रफल का कम होना।

भीमताल का क्षेत्रफल लगातार कम होने की बातें समय-समय पर उजागर होती रहती है आकड़ों की अगर बात करें तो वर्ष 1904-05 में भीमताल का क्षेत्रफल लगभग 60 हेक्टेयर था जोकि वर्ष 1984-85 में घटकर 46.26 हेक्टेयर रह गया था, साथ ही वर्ष 1871 में भीमताल झील की गहराई लगभग 39 मीटर थी जोकि साल 1975 में घटकर लगभग 27 मीटर रह गई थी, इसके बाद साल 1985 में यह 22 मीटर थी और वर्तमान समय में झील की गहराई घटकर लगभग 17 मीटर रह गई है। (नोटये आकड़े ईटीवी भारत के 24 अप्रैल 2024 के लेख से लिए गए हैं )

खूबसूरती पर धब्बा

आधुनिकीकरण का असर अब भीमताल में भी देखने को मिल रहा है, ताल को चारों तरफ से होटल और रिसॉर्ट के जाल ने पूरी तरह से लपेट लिया है, तालाब में जाने वाले पानी के स्रोतों के मुहानों को होटल और घरों के निर्माण कार्य ने बंद कर दिया है और कई होटलों का गंदा पानी रिस-रिसकर वापस ताल में जाने के लिए छोड़ दिया जाता है जो कि प्रकृति के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है और ताल से संबंधित सभी जीवजंतुओं के जीवनचक्र को भी प्रभावित कर रहा है। हर रोज हजारों छोटी-बड़ी मछलियां इस प्रदूषण से अपनी जान गवा रही हैं, बतख, पंछी व छोटे जीवजंतु भी इस मानवकृत आपदा के शिकार हो रहे हैं।

सूखने की कगार पर भीमताल झील

वर्तमान समय की अगर बात करें तो भीमताल झील का पानी सूखने की कगार पर है, बरसात के दिनों में कभी सड़क के पास तक ताल का जलस्तर आ जाता था लेकिन अभी लगभग 50 से 100 मीटर का दायरा पूरी तरह से सूख चुका है और वहां रेत तथा कीचड़ ही कीचड़ नजर आने लग गया है।

सूखने की कगार पर भीमताल
सूखने की कगार पर भीमताल झील।

इस सूखने के पीछे बहुत सारे कारण है जिसमें से लंबे समय से बारिश का न होना, नदियों के पानी को पाइपों से दूर-दूर तक खींच लेना, पानी का दुरुपयोग करना और अत्यधिक गर्मी बढ़ना माना जा रहा है लेकिन जिस मानव-निर्मित समस्या के कारण तालों का जलस्तर घट रहा है उस पर कोई भी चर्चा करने को तैयार नहीं है।

मानव-निर्मित समस्याएं

अंधाधुंध विकास के नाम पर नदियों और नालों को पाट देना तथा उसके ऊपर बड़े-बड़े कंक्रीट और सीमेंट के पहाड़ खड़े कर देना भी इसका एक मुख्य कारण है, बरसात का पानी जल स्रोतों को रिचार्ज करने का काम करता था लेकिन आज सड़कों का जाल बिछाने के नाम पर खाली भूमि को डामर और कंक्रीट से भर दिया गया है जिसके चलते बारिश का पानी सीधे बह जा रहा है और बरसात के दिनों में वह पानी भूमि के गर्भ में समाने के वजाय सीधे महासागरों में चले जा रहा है, बची कुची कमी इंसानों के खुद को इस सृष्टि का मालिक समझ लेने की भूल ने पूरी कर दी है।

प्लास्टिक है पर्यावरण का दुश्मन

इंसान अपनी सुविधाओं के लिए जिस प्रकार से प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहा है उससे हमारी जमीन बंजर तो हो ही रही है साथ में जमीन के पानी सोखने की क्षमता भी समाप्त हो रही है आज दुनिया भर की चीजें पैक्ड रूप में पॉलिथीन के अंदर बंद होकर गांव-गांव तक पहुचाई जा रही हैं,  प्लास्टिक का यह कूड़ा जमीन में जहां भी फेंका जा रहा है यह उस जगह को पूरी तरह से बर्बाद कर रहा है और बारिश के पानी को जमीन के अंदर जाने से भी रोक रहा है यही कारण है कि हमारे भू-जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पा रहे हैं और सूखे की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

निष्कर्ष

ये मात्र एक झील के अस्तित्व पर आने वाले संकट का सवाल नहीं है, ये सवाल है मावन के अस्तित्व पर आने वाले संकट का, जलस्तर कम होने की जो समस्या भीमताल में देखी जा रही है ऐसी ही समस्याएं आज पूरे देश में देखने को मिल रही हैं लेकिन इस तरफ कोई ध्यान देना ही नहीं चाह रहा है।

मीडिया को, आम जनता को और हमारी सरकारों को जाति-धर्म जैसी गैरजरूरी मुद्दों के बजाए पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के मुद्दों पर गहन चिंतन करना चाहिए और लोगों को जागरूक करना चाहिए और लोगों को भी समझना चाहिए कि “जल है तो जीवन है” और “जीवन है तभी जातियों और धर्मों का अस्तित्व भी है”।।*************************************

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