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लोकतंत्र का राजा। कालजेयी राज्य के जिद्दी राजा की कहानी

जनता द्वारा चुना गया राजा। 

कालजेयी नाम का एक प्राचीन राज्य है जोकि हजारों सालों से अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना जाता है, उस राज्य का इतिहास रामायण, महाभारत से भी पुराना है, उस राज्य ने कई धर्मों , संप्रदायों, जातियों को पनपते-उजड़ते देखा है। उस राज्य में समय-समय पर अलग-अगल धार्मिक मान्यताओं के राजाओं ने राज किया है और उसकी संरचना व पृष्ठभूमि को अपनी सोच-विचार के अनुसार बदलने की कोशिश की लेकिन समयचक्र का ऐसा असर हुआ कि राजा आते जाते रहे लेकिन धीरे-धीरे राज्य अपनी “विविधता में एकता” की पुरानी विचारधारा को ही अपना लेता है।

कुछ साल पहले की बात है कालजेयी नामक यह प्राचीन राज्य विदेशी ताकतों की गुलामी के चंगुल से छूटकर आजाद हुआ, आजादी की इस लड़ाई में सभी ने मिलकर भरपूर सहयोग किया कोई फांसी चढ़ गया, किसी ने गोली खा ली तो कोई गुमनामी में ही रह गया।

आजादी के बाद उस राज्य में जनता का राज यानी लोकतंत्र लागू हो गया, जहाँ जनता अपने पसंदीदा लोगों को चुनकर उन्हें खुद पर राज करने का मौका देती है, ये समझिए कि जनता कुछ चुनिंदा लोगों को अपनी तिजोरी की चाबी देती है इस उम्मीद के साथ कि उसके परिवार के सदस्यों पर किसी भी प्रकार की कोई मुसीबत आएगी तो उसके द्वारा चुना गया व्यक्ति उसकी तथा उसके परिवार की रक्षा करेगा, इसी उम्मीद के लिए वह टैक्स रुपी हफ्ता उस चुनिंदा व्यक्ति या व्यक्तियों के संगठन को देता है।

कालजेयी नामक यह देश भले ही विदेशी ताकतों से आजाद हो गया हो लेकिन गुलामी की सोच लोगों के दिलो-दिमाग में इस कदर बस चुकी थी कि लोकतंत्र के बाद भी यहां की जनता गुलामी की विचारधारा से आजाद नहीं हो पायी।

यहां समय-समय पर जनता अपने लिए जिन राजाओं को चुनती है कुछ ही सालों में उनसे त्रस्त होकर नए राजा की तलाश में लग जाती है, आने वाले कुछ सालों तक पूरी लगन व मेहनत के साथ उस राजा की गुलामी में लग जाती है तथा उसके द्वारा किए जा रहे जुल्मों को सहती रहती है॥

कालजेयी राज्य का जिद्दी राजा 

कुछ राजाओं के शासन से त्रस्त जनता ने एक बार एक जिद्दी राजा को भाग्यविधाता समझकर सत्ता सौंप दी, राजा वाक-पटुता में इतना निपुण था कि आंखों में आंखे डालकर दिन को रात और रात को दोपहर बताकर वाहवाही लूट सकता था, राजा ने लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को ही सरकारी विज्ञापनों का लालच देकर 24 घंटे खुद की वाहवाही करने में लगा दिया, चौथा स्तम्भ यानी मीडिया इतना प्रभावित हुआ कि उस जिद्दी राजा को सर्वश्रेष्ठ बताने और उसके द्वारा खुद के शौक व जिद को पूरा करने की बचकानी व अज्ञानतापूर्ण हरकतों को भी मास्टरस्ट्रोक बताकर बड़ा चढ़कर दिखाने में लग गया।

ये सारी घटनाओं को देखकर कालजेयी नामक राज्य की जनता का एक वर्ग विवेकशून्य होकर इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि राजा के झूठ को सच मानकर उसकी आरती उतारने पर लगा हुआ है, राजा दिन को रात कह दे तो वो वर्ग भरी दोपहरी में मोमबत्ती जलाकर रौशनी करने लग जाए, राजा कभी बिमारी भगाने के लिए संख-घंटे घड़ियाल, थाली बजवाता तो जनता घर के बर्तन तक फोड़ने को तैयार हो जाती।

जिद्दी राजा को जैसे ही लगता कि जनता मुख्य बिंदुओं पर सवाल पूछ सकती है तो वो हर बार एक नयी मुहिम चला देता, कभी जाति-धर्म के नाम पर लड़ा देता तो कभी मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम के नाम पर लोगों को एक दूसरे का विरोधी बता देता, यहां तक कि राजा और उसकी सेना देश को अखंड बनाने के नाम पर लोगों को खंड-खंड में बाटने से भी नहीं कतराती।

हर रोज टेलीविजनों व अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर राजा अपने राज्य की तरक्की के इतने वादे कर चुका था कि उसकी कही हुई बातें धीरे-धीरे किस्से और कहानियां नजर आने लग जाती थी, राजा जिस गांव में जाता वहां की बोली, वहां की संस्कृति के गुणगान कर देता, गांव के लोग खुशी से झूम उठते और राजा के जयकारे लगाने लग जाते।

नए युग की अनोखी युनिवर्सिटी। 

नए युग में राजा ने अपने राज्य में एक नई युनिवर्सिटी का निर्माण कराया, जहां इतिहास के महान लोगों के चरित्र पर एक्सपेरिमेंट किया जाता था, खुद को सबसे ज्यादा महान साबित करने के लिए इस नए युग की अनोखी युनिवर्सिटी में देश की महान विभूतियों को ही देश का दुश्मन बताया जाता था, सबसे बड़ी बात यह थी कि इस युनिवर्सिटी का विद्यार्थी बनने के लिए किसी भी डिग्री की आवश्यकता नहीं थी, आवश्यकता थी तो सिर्फ विवेकशून्य होने की और मस्तिष्क के इस्तेमाल किए बिना उस युनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम को ग्रहण करने की तथा उस ज्ञान को संपूर्ण राज्य में फैलाने की॥

कहानी तो काल्पनिक है, इसके पात्र भी काल्पनिक हैं! 

बताना तो भूल ही गया कि ये कहानी काल्पनिक है! इसके पात्र भी काल्पनिक हैं! और आपको घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये कालजेयी राज्य की कहानी है जहाँ की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां की “विविधता में एकता” की विचारधारा समय के साथ-साथ दोबारा पुनर्जीवित हो उठती है और कालजेयी राज्य पुनः अपनी धुरी पर घूमने लगता है यहां जन्म लेने वाला हर व्यक्ति जिंदगी के परम सत्य से होकर ही गुजरा है कोई भी यहां हमेशा नहीं रहा परंतु ये वाला राजा सबसे अलग है वो अमर है, अजर है क्योंकि हमने सुना है कि राजा देवमानुष है, भगवान का अवतार है, वो राजा है तो कुछ भी मुमकिन है॥

वैसे आपको बता दूं कि लोकतंत्र के राजा की कहानी अभी शुरू ही हुई है, राजा और उसके राज्य के भूत, भविष्य ओर वर्तमान की कई कहानियां लेखक के मस्तिष्क में जन्म ले चुकी हैं, लेखक समय-समय पर अपनी कल्पनाओं को उजागर करता रहेगा क्योंकि राजा से राजनीति सीखने के बाद लेखक भी जिद्दी हो गया है, राजा के उस अनोखी युनिवर्सिटी का हिस्सा तो नहीं है पर खुद की एक अलग युनिवर्सिटी तैयार करने की क्षमता लेखक भी रखता है, क्योंकि चुनावी वादों का अध्ययन करते-करते लेखक खुद झूठ बोलने में पीएचडी कर चुका है, बस नाम के आगे डाक्टर लगना बाकी है॥

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नोटलोकतंत्र का राजा सिरीज की यह पहली कहानी है इसके अभी और भी अंश आपको पढ़ने को मिलेंगे, अगर आपको हमारी यह कहानी पसंद आयी है तो नीचे दिए गए व्हटसएप और फेसबुक के आइकन पर टच करके अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ इसे शेयर जरूर करें। 

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