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कुमाऊँनी होली – सांवरिया मोहन गिरधारी

सांवरिया मोहन गिरधारी

कुमाऊँनी होली के गीतों में प्रसिद्ध गीत है “सांवरिया मोहन गिरधारी”। यह गीत बैठक होली तथा खड़ी होली दोनों में अलग-अलग गायन शैली में गायी जाती है॥

सांवरिया मोहन-गिरधारी, सांवरिया मोहन-गिरधारी।
दिखावे लीला न्यारी-न्यारी, सांवरिया मोहन-गिरधारी॥
चंद्र सखी गोरस के निकासी, बीच मिलो है गिरधारी।
सांवरिया मोहन-गिरधारी॥
मोर मुकुट पीतांबर सोहे, कुंडल छवि है न्यारी।
हाथ लकड़िया मुख में मुरलिया, कंधे एक कमलिया है काली।
सांवरिया मोहन-गिरधारी॥
दही दोनों खाई मटकी दोनों फोड़े, मखमल की अंगिया फाड़ी।
लेकर क्या कदम चढ़ बैठो, हम जमुना तीर हैं ठाड़ी।
सांवरिया मोहन-गिरधारी॥
चीर हमारो दे गिरधारी, तेरे चरण की बलिहारी।
चीर तुम्हारो जबहि मिलेगो, हो जाओ जल से न्यारी।
सांवरिया मोहन-गिरधारी॥
जल से नारी कैसे हुए, तुम हो पुरुष हम हैं नारी।
सांवरिया मोहन-गिरधारी, सांवरिया मोहन गिरधारी॥

 

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👉हां हां हां मोहन गिरधारी

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नोट-  यह लेख डा० निर्मला कोरंगा जी व डा० अनुराधा त्रिपाठी जी की किताब कुमाऊँनी होलीयां से प्रेरित होकर लिखी गई है।

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